PAHAR-8

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सिलसिला : पहाड़-8

पहाड़ की ओर से अपनी पृथ्वी की चिंता

एक : जनसांख्यिकी

1991 हिमालय का जनसंख्या परिदृश्य रमेश चन्द्र सिंह, रघुवीर चन्द तथा कृष्ण कुमार

दो : पुरातत्व

यमुनाघाटी  उत्तराखण्ड में नृवंशीय पुरातत्व प्रदीप मोहन सकलानी,विनोद नौटियाल तथा

बृज मोहन खंडूरी

तीन : आर्थिक पक्ष

नव अध्याय लीपूलेख से सीमा व्यापार ललित पंत

चार : समाज- संस्कृति

व्याख्यान -1 स्वाधीनता बनाम राष्ट्रीयता पूरन जोशी

व्याख्यान -2    विज्ञान, संस्कृति और पर्यावरण देवी दत्त पंत

पाँच : लोक संस्कृति

पाण्डव नृत्य नाटक एक जीवन्त निरंतरता शंतन सिंह नेगी तथा कांति प्रसाद नौटियाल

छ : साहित्य

कविता       अन्दाज अपने अपने लीलाधर जगूड़ी, ओम भारती, अशोक पाण्डे, हरीश चन्द्र पाण्डे, प्रभात जोशी, बद्री नारायण, बल्ली सिंह चीमा, ज़हूर आलम, सुभाष रावत,राजेश भण्डारी तथा सिद्धेश्वर सिंह

सात : संस्मरण

मेरा इतिवृत     डा. राममनोहर लोहिया और मैं भैरव दत्त धूलिया

किशनराम       सनिउडियार का सिपाही मथुरा लाल साह

आठ : घुम्मकड़ी

हैवन लेक     नीली झील, हरी पहड़ियाँ विक्रम सेठ

नामा सेला पास  विस्मृत यात्रा पथ में डुंगर सिंह ढकरियाल ‘हिमराज’

नौ : चर्चा के योग्य

आन सिंह    जंगम पुस्तकघर यशोधर मठपाल

दस : श्रद्धांजलि

केशव अनुरागी सलामवलेकुम गिरिश तिवारी

शमशेर सिंह पर मैं तो इसी शरीर से अमर हूँ अशोक पाण्डे

मन्मथन मनुष्य के पिशाचत्व के विरूद्ध अवध बिहारी पंत

कामरेड मदन भण्डारी   एक स्वभाविक साम्यवादी गोपाल पुरागाई

रामदत्त पर्वतीयकर      साधक और आविष्कारक बि. ना. साह ‘सखा’

जयंतीपंथ           जे नदी मरूस्थले हरालौ धाय शिवानी

टिंचरी माई          तुमको लौटना होगा कमल जोशी

ग्यारह : जो लिखा जा रहा है

जिक्रभर विविध प्रकाशन गिरिजा पाण्डे

बारह : जिन्हें हम भूलना चाहें

स्मरण दशक से द्विशताब्दी तक शे. पा.

तेरह : पर्वतांतर

पत्र          छोटे पर्वतों से हैले प्रिमडल