• पलायन का दुष्चक्र

    पलायन का दुष्चक्र

    उत्तराखंड में रिवर्स माइग्रेशन की कल्पना करना ठीक नहीं है फिर भी वर्तमान पीढ़ी को पलायन से रोकने के लिए जमीनी स्तर पर प्रयासों की जरूरत है जिसके लिए स्थानीयता का अध्ययन कर योजनाएँ बनाने के साथ स्थानीय युवाओं की सहभागिता अनिवार्य है उत्तराखंड से पलायन कर गए कुछ चुनिंदा लोग ही अपने क्षेत्र में…

  • खिले हैं बुरांश

    खिले हैं बुरांश

    थ्रीश कपूर एक जाने माने फोटोग्राफर है। उत्तराखंड ग्रामीण बैंक के चेयरमैन पद से रिटायर होने के पश्चात भी उन्होंने रिटायरमेंट लेने से मना कर दिया और अपनी दूसरी पारी शुरू की – हास्पिटैलिटी सेक्टर में। हिमालय की गोद में पले बड़े थ्रीश कपूर का बुरांश प्रेम इस बात से भी जाहिर होता है की…

  • भागीरथी घाटी में जल-विद्युत परियोजनायें और स्थानीय धारणा

    भागीरथी घाटी में जल-विद्युत परियोजनायें और स्थानीय धारणा

    भारतीय हिमालयी क्षेत्र में जल-विद्युत परियोजनाओं का निर्माण विवादास्पद रहा है। ऐसी परियोजनाओं को लेकर अब तक जितने भी अध्ययन सामने आये हैं, उनमें से अधिकांश सामाजिक ताने-बाने में परिवर्तन, जनसांख्यिकी बदलाव, वनों, जैव विविधता, व कृषि भूमि के नुकसान के साथ-साथ स्थानीय लोगों एवं अन्य दूसरे हितधारकों की धारणाओं पर केन्द्रित रहे है।

  • तिब्बत के गर-गुन्शा का चीनी फौजी कैम्प   

    तिब्बत के गर-गुन्शा का चीनी फौजी कैम्प   

    काफी समय से मेरी तिब्बत जाने की योजना थी। गढ़वाल के सरहदी गावों के व्यापारी हर वर्ष तिब्बत जाते थे। वे जुलाई में वहाँ जा अक्टूबर तक व्यापार करते और बर्फ पड़ने से पहले वापस लौट आते। भारत से वे गुड़, चीनी, कपड़ा, तंबाखू, बर्तन, खाने-पीने और रोज़ाना इस्तेमाल का सामान ले जाकर बेचते और…

  • ओड़-बारुड़ि जैसा वो कवि

    ओड़-बारुड़ि जैसा वो कवि

    नैनीताल मेरी नज़रों में आभिजात्य लोगों का ही शहर तो था। डीएसबी में एडमिशन लेने के बाद ऐसे गाढ़े अँग्रेज़ी माहौल में मुझे ठेठ पहाड़ी जुमले ‘भभरि जाने’ का असली एहसास होने लगा। और तब गिरदा प्रकट हुए।

  • जिन्दगी से भरे जीवन सिंह मेहता

    जिन्दगी से भरे जीवन सिंह मेहता

    डॉ. जीवन सिंह मेहता वास्तव में वन और वनस्पति विज्ञान के गहरे अध्येता थे। जंगलात विभाग की नौकरी ने उन्हें वन-वनस्पति का प्रत्यक्ष अनुभव भी दिया। इसलिये वे सिर्फ किताबी विद्वान नहीं थे।

  • सुन्दरलाल बहुगुणा | एक जटिल युग का अन्त

    सुन्दरलाल बहुगुणा | एक जटिल युग का अन्त

    उत्तराखण्ड की सामाजिक-सांस्कृतिक पहचान सबसे ज्यादा सामाजिक कार्यकर्ताओं और सामाजिक आन्दोलनों से ही बनी। इसमें सुन्दरलाल बहुगुणा की महत्वपूर्ण भूमिका सदा याद की जायेगी।

  • लाल बहादुर वर्मा : एक बहुमंजिली प्रतिभा

    लाल बहादुर वर्मा : एक बहुमंजिली प्रतिभा

    कितना कुछ वे अभी भी कर रहे थे। दरअसल जब वे कहते थे कि आजकल कुछ नहीं कर रहे हैं तो भी वे कुछ न कुछ कर रहे होते थे। जब वे जाड़ों में दक्षि ण और गर्मि यों में पहाड़ों में कहीं एक-दो माह रहते तो कोई न कोई पांडुलिपि बनकर उनके साथ वाप…

  • डॉ. जीवन सिंह मेहता को हम सबका अन्तिम सलाम

    डॉ. जीवन सिंह मेहता को हम सबका अन्तिम सलाम

    एक सम्वेदनशील नागरिक, समर्पित वनविद, चिरयात्री, प्रयोगकर्ता, खिलाड़ी, स्पष्टवादी; पहाड़, चिया, वन अधिकारी संस्था आदि के आधार; उत्तराखण्ड तथा हिमालय सम्बन्धी अधिकांश विषयों पर अपनी आधिकारिक टिप्पणी और लेख लिखने वाले; स्पष्ट वक्ता, जरूरतमंदों की चुपचाप मदद करने वाले और लोक जीवन में अत्यन्त रुचि रखने वाले पता नहीं और क्या क्या थे वे।

  • कालापानी और लीपूलेख: एक पड़ताल

    कालापानी और लीपूलेख: एक पड़ताल

    भारतीय तथा नेपाली राजनय, राजनीति, मीडिया और नागरिक समाज को समझदारी और परस्पर सम्मान के साथ इन विवादों को समझना व सुलझाना होगा। संकुचित राष्ट्रवाद न नेपाल को कहीं ले जायेगा और न भारत को। याद रहे कि दो भाइयों से पहले ये दो राष्ट्र दक्षिण एशिया के दो स्वायत्त और स्वतंत्र गणतंत्र हैं।