• हिमालय से हिमाकत का नतीजा हैं हिमनद झीलों का खतरा

    हिमालय से हिमाकत का नतीजा हैं हिमनद झीलों का खतरा

    नेशनल स्नो एंड आइस डाटा सेंटर की एक रिपोर्ट के मुताबिक हिमनद झीलें तब बनती हैं जब ग्लेशियर पीछे हटता है और पिघलता हुआ पानी ग्लेशियर द्वारा छोड़े गए गड्ढों में भर जाता है। हिमस्खलन और ग्लेशियरों के हिमखंड गिरने से यह झीलें ओवरफ्लो जाती हैं।

  • मृतप्राय नदी – महाकाली का डेथ वारंट रोकने का प्रयास

    मृतप्राय नदी – महाकाली का डेथ वारंट रोकने का प्रयास

    कुछ लोग कहते हैं- महाकाली के मरने की रफ्तार भागीरथी और भिलंगना से कई गुना तेज होगी। क्योंकि, यहां प्रतिरोध ना के बराबर है। इसलिए यहां प्रतिरोध की संभावनाओं को तलाशने और इसे ताकतवर बनाने के लिए यह पुस्तिका अहम दस्तावेज साबित होने वाली है। 

  • ऋषिगंगा और हिमालयी ग्लेशियरों से उपजी आपदा

    ऋषिगंगा और हिमालयी ग्लेशियरों से उपजी आपदा

    ऋषिगंगा नदी भी मंदाकिनी नदी की तरह ही हिमाच्छादित पर्वत और उनसे निकले ग्लेशियरों से रिसे पानी को संग्रह करते हुए नदी का स्वरूप पाती है। ऋषिगंगा के जलग्रहण में मंदाकिनी नदी से ज्यादा ग्लेशियर और हिमशिखर हैं।

  • रणबीर रावल – एक वैज्ञानिक का असमय जाना

    रणबीर रावल – एक वैज्ञानिक का असमय जाना

    रणबीर बहुत सम्वेदनशील था। नैनीताल के विद्यार्थी काल, पंत संस्थान के वैज्ञानिक और फिर निदेशक के रूप में वह हर बार नये सवालों से रूबरू होता था। मुझे याद है कि अनेक बार एस.पी. सिंह, जयन्ता बन्द्योपाध्याय, हेम पाण्डे, जे.एस. मेहता आदि तमाम मित्रों के साथ हो रही चर्चा के केन्द्र में ये नये आयाम…

  • तिलाड़ी काण्ड – उत्तराखण्ड का जालियाँवाला बाग

    तिलाड़ी काण्ड – उत्तराखण्ड का जालियाँवाला बाग

    तिलाड़ी काण्ड की पृष्ठभूमि वनों के सीमांकन के साथ ही बन चुकी थी जब स्थानीय ग्रामीणों को उन्हे उन्हीं के जंगलों की सीमा पर बाँध दिया गया। टिहरी राजदरबार द्वारा लगातार ब्रिटिश साम्राज्यवादी माडल को इन क्षेत्रों में लागू किया जा रहा था, जिसमें वनों को अकूत संपत्ति अर्जित करने का स्रोत मान लिया गया…

  • शेरपाओं का सागरमाथा

    शेरपाओं का सागरमाथा

    शेरपा, जिन्हें कि बरफीले क्षेत्रों का बाग कहा जाता है और 1920 से अब तक के ऐवरेस्ट अभियानों में जिनके 23 पुरूष दिवंगत हो चुके हैं, यहाँ के पुराने निवासी हैं। उनकी चारे और ईधन की जरूरत से सैकड़ों सालों में भी प्राकतिक सन्तुलन नहीं टूटा।

  • सागरमाथा और एडमंड हिलेरी

    सागरमाथा और एडमंड हिलेरी

    चोमोलंगमा या सागरमाथा पर चढ़ने वाले वाले शेरपा तेनजिंग नोरगे और एडमंड हिलेरी ने शिखर पर पहुँचने  के बाद ही एहसास किया कि इतना आकर्षक पर्वत शिखर बहुत नाजुक और संवेदनशील तो है ही, इसके चारों रहने वाला वाला समाज भी उतना ही बाहरी दबावों के खतरों से घिरा है। एडमंड हिलेरी ने अपने अनुभवों…

  • चिपको आंदोलन पर एक जरूरी किताब

    चिपको आंदोलन पर एक जरूरी किताब

    चिपको मूलतः पहाड़ी किसानों का आन्दोलन था। वाणी प्रकाशन, नई दिल्ली और भारतीय उच्च अध्ययन संस्थान, शिमला से प्रकाशित पुस्तक ‘हरी भरी उम्मीद’ उसी समाज को समर्पित है जो जंगलों के मायने समझता है।

  • उत्तराखंड में रामलीला की परंपरा

    उत्तराखंड में रामलीला की परंपरा

    उत्तराखंड में रामलीला मंचन में समसामयिक विषयों एवं घटनाक्रमों को भी शामिल करना इसकी प्रयोगधर्मिता का उदाहरण है। 1947 ई0 में स्वतंत्रता प्राप्ति के उल्लास एवं उत्साह की अभिव्यक्ति रामलीला के मंच में प्रमुख देवताओं के छायाचित्रों के साथ नेताजी सुभाषचन्द्र बोस का छायाचित्र रखे  जाने और  देशभक्ति के गीतों का रामलीला में समावेशन किया…